राहु – यह एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही कई लोगों के मन में डर उत्पन्न हो जाता है। राहु की दशा आने से पहले ही लोग चिंतित हो जाते हैं कि कहीं कोई अनिष्ट न हो जाए। वास्तव में, राहु की दशा में जीवन में कई प्रकार की समस्याएँ आ सकती हैं, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह दशा लाभदायक भी साबित होती है।
राहु और केतु का महत्व
सौरमंडल में राहु और केतु का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है। वैदिक ज्योतिष में इन्हें छाया ग्रह माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु देवताओं के बीच अमृत बाँट रहे थे, तब स्वर्भानु नामक एक असुर ने देवता का रूप धारण करके अमृत पी लिया।
जब सूर्य और चंद्रमा ने यह बात भगवान विष्णु को बताई, तो उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से उस असुर का सिर काट दिया। लेकिन अमृत पीने के कारण वह अमर हो चुका था, और उसका शरीर दो भागों में विभाजित हो गया। सिर वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु के रूप में जाना गया। चूँकि सूर्य और चंद्रमा ने राहु का भेद खोला था, इसलिए वह बदला लेने के लिए इन्हें समय-समय पर ग्रस लेता है, जिसे हम सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के रूप में जानते हैं।
राहु का प्रभाव
कुंडली चक्र में राहु और केतु की कोई अपनी राशि या घर नहीं होता। कुछ ज्योतिषी राहु को कुम्भ राशि का सह-स्वामी मानते हैं, जबकि कुछ इसे वृषभ या मिथुन राशि में उच्च मानते हैं। इसी तरह, केतु को वृश्चिक या धनु राशि में उच्च माना जाता है।
वैदिक ज्योतिष में राहु को सांसारिक सुखों और भौतिकता का प्रतीक माना गया है। राहु की दशा में व्यक्ति धन, भोजन, मनोरंजन और विलासिता की ओर अधिक आकर्षित होता है। लेकिन भौतिक सुखों की अति के कारण व्यक्ति धर्म, नैतिकता और आध्यात्मिकता से दूर होने लगता है।
इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्थिति प्रभावित होने लगती है, कार्यों में बाधा आती है, पारिवारिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, और कई बार जीवन में बड़े संकट भी आ जाते हैं।
राहु की दशा में शुभ फल पाने के उपाय
राहु की नकारात्मकता से बचने का सबसे सरल उपाय है केतु के गुणों को अपनाना। केतु को आध्यात्मिकता और मोक्ष का कारक माना जाता है। यदि हम राहु की नकारात्मकता से बचना चाहते हैं, तो हमें अपने जीवन में अनुशासन, स्वच्छता, नैतिकता और धार्मिकता को अपनाना होगा।
केतु से जुड़ने का अर्थ है –
✔ अनुशासित जीवनशैली अपनाना
✔ साफ-सफाई और पवित्रता बनाए रखना
✔ नैतिकता और धर्म का पालन करना
✔ आध्यात्मिकता की ओर झुकाव रखना
विशेष उपाय:
✅ राहु की दशा में यदि अधिक कठिनाइयाँ हो रही हों, तो मांसाहार का त्याग करें और सात्त्विक भोजन ग्रहण करें।
✅ नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहें।
✅ प्रतिदिन हनुमान चालीसा या भगवान शिव का ध्यान करें।
✅ राहु के मंत्रों का जाप करें, जैसे – "ॐ रां राहवे नमः"।
✅ काले तिल, नारियल और उड़द दाल का दान करें।
निष्कर्ष
यदि कोई व्यक्ति राहु की दशा में भी केतु के गुणों को अपनाकर अनुशासन और धार्मिकता से जीवन व्यतीत करता है, तो राहु उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता। बल्कि आध्यात्मिकता से जुड़े रहने के कारण उसे जीवन में सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति हो सकती है।
Read more
- वृश्चिक लग्न या राशि में संतान भाव क्यों कष्टदायक होता है?
- वृश्चिक लग्न और राशि की विभिन्न समस्याएँ और उनके समाधान।
- वृश्चिक लग्न और राशि का धन एवं पारिवारिक जीवन
No comments:
Post a Comment